माता अम्बिका जी की आरती को अक्टूबर 25, 2019 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप श्री अम्बाजीकी आरती ॐ जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी ॥ तुमको निशदिन ध्यावत , हरी ब्रह्मा शिवरी ॥१॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ मांग सिन्दूर विराजत , टीको मृगमद को । उज्जवल से दोउ नैना , चन्द्रवदन नीको ॥२॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ कनक समान कलेवर , रक्ताम्बर राजे । रक्तपुष्प गल माला , कण्ठन पर साजे ॥३॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ केहरि वाहन राजत , खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनि-जन सेवत , तिनके दुःख हारी ॥४॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ कानन कुण्डल शोभित , नासाग्रे मोती । कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति ॥५॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ शुम्भ निशुम्भ विदारे , महिषासुर-घाती । धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती ॥६॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ चण्ड मुण्ड संहारे , शोणित बीज हरे । मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे ॥७॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ ब्रह्माणी , रुद्राणी तुम कमलारानी । आगम-निगम-बखानी तुम शिव पटरानी॥८॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ चौंसठ योगिनी गावत , नृत्य करत भैरों । बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू ॥९॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ तुम ही जगकी माता , तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ॥१०॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ भुजा चार अति शोभित , वर-मुद्रा धारी । मनवाञ्छित फल पावत , सेवत नर- नारी ॥११॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥१२॥ ॥ ॐ जय अम्बे गौरी... ॥ श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित पावे ॥१३॥ टिप्पणियाँ
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