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श्री राम रहस्य उपनिषद


मुक्तक उपनिषद में कुल 108 उपनिषद दिए गए हैं जिसमें इस उपनिषद का 54 बां स्थान है।

 (राम रहस्य उपनिषद)

मैं उस भगवान को नमन करता हूं जो मुक्ति के शरीर रूप हैं, जो मुक्ति के अवतार हैं, व्यक्ति भी है और महान राजा भी है। और जो अपने सभी शत्रुओं का नाश करते हैं।।

 मुद्गल, शांडिल्य, पैगल,सनक और  प्रहलाद जैसे जाने-माने भक्त महान विष्णु भक्त हनुमान जी के पास गये और उन्होंने उनसे यह प्रश्न किया-प्रभु !कृप्या हमें बताओ कि चारों वेदों, अठारह पुराणों में, 18 स्मृतियों में, सभी शास्त्रों में, सारे ज्ञान में तथा सूर्य और चंद्रमा द्वारा शासित जो सभी शक्तियां हैं, उन सब में सबसे बड़ा सिद्धांत क्या है?
 उत्तर में भगवान हनुमान जी ने कहा- महान ऋषियों और विष्णु भक्तों ! मैं बताता हूं मेरी बात ,मेरे शब्द ध्यान से सुनो यह शब्द सभी बंधन, सभी आसक्तियां काट देते हैं। आप लोग यह अच्छी तरह जान लो की इन सब में जो सबसे बड़ा सिद्धांत है वह तो तारक ब्रह्म का सिद्धांत है, तुम लोग यह भी जान लो की राम परब्रह्म है, राम परम तपस्या है, राम ही परम सार(तत्व)है ,राम ही तारक ब्रह्म है।
 तब फिर उन्होंने हनुमान से पूछा-हमें भगवान राम के अंगों , उनके रूपों तथा उनके विभिन्न पहलुओं के बारे में बताओ। हनुमान ने उत्तर में बताया कि आप सब यह समझ लो कि भगवान गणेश, सरस्वती देवी ,दुर्गा, सभी क्षेत्रपाल ,नारायण, भगवान नरसिंह ,वासुदेव भगवान ,वराह भगवान , लक्ष्मण ,शत्रुघ्न, भरत, विभीषण ,सुग्रीव, अंगद,जामवंत तथा प्रणव यह सब के सब राम के ही अंग है, राम के रूप है राम के ही पहलू है। बिना अपने अंगों के राम सभी अवरोध या रुकावटें दूर नहीं हटाते ।
ऋषियों ने फिर पूछा प्रभु कृपया हमें बताओ की ब्राह्मणों तथा आम लोगों  को ओम का ध्यान करने की शक्ति या क्षमता कैसे मिल सकती है ?हनुमान ने बताया- जो लोग राम के 6 अक्षरों वाले मंत्र का जप करते हैं, उन सबको प्रणव ओम का जप करने की शक्ति मिल जाती है। चाहे वे सब ओम का जप के योग्य हो या न हों। जो कोई भी चुपचाप अपने मन में ही राम मंत्र का जाप करता है उसे वही लाभ, उसे वही फायदा मिलता है जो
उसे ओम को बार-बार दोहराने से मिलता है। ऋषि का नाम लेने के बाद ,देवता का नाम लेने के बाद तथा छंद का नाम लेने के बाद राम का जप करने से व्यक्ति को वही लाभ मिलता है जो लाभ उसे उनको बार-बार दोहराने से बनता है। हनुमान ने आगे बताया -कि राम ने तो स्वयं कहां है -"प्रणव राम मंत्र का ही भाग है "और एक दूसरे अवसर पर विभीषण ने राम से पूछा - भगवान आपके अंगों की पूजा तथा उपासना को आसान कैसे बनाया जा सकता है? कृपया मुझे बताइए । इस पूजा का आसान तरीका बताओ भगवान राम ने बताया -विभीषण मेरे  राम नाम का जप करना सभी पापों को दूर करता है। यदि कोई मेरे 6 अक्षरों वाले मंत्र का ध्यान करता है या मेरी गीता पड़ता है या मेरे बारे में भक्ति भाव से चिंतन करता है तो उसे भी वही लाभ मिलेगा, उसके भी सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। जो व्यक्ति मेरे इस मंत्र को 1करोड़ बार दोहराएगा । वह  सभी महान पापों से मुक्त हो जाएगा जैसे कि माता, पिता ,बहन आदि की हत्या और अन्य सभी पापों से भी मुक्त हो जाता है, उसे सदा आनंद की प्राप्ति हो जाएगी।
विभीषण ने फिर पूछा लेकिन भगवान उन लोगों के लिए क्या रास्ता है ? जो लोग यह सब करने में सक्षम नहीं है ।भगवान राम ने बताया- ऐसे लोगों के लिए विकल्प है या तो बे मेरी गीता पढ़ सकते हैं या 1000 नामों का  जप कर सकते हैं या वह मेरे विश्वरूप का ध्यान कर सकते हैं या वह मेरे108 नाम  दोहरा सकते हैं या वह वह देवर्षि नारद द्वारा बतलाए गए मार्ग को अपना सकते हैं या हनुमान द्वारा की गई स्तुति या सीता द्वारा की गई प्रार्थना को पढ़ सकते हैं। ऐसा करने से वह मुझे अवश्य प्राप्त कर लेंगे यहां पर यह पहला अध्याय समाप्त होता है।









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