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रात्रि में चितवन से परमेश्वर का दीदार, मोहम्मद बोध, शब-ए-मेराज पुस्तक का सार

 रात्रि में चितवन से परब्रह्म परमेश्वर का दीदार, मोहम्मद बोध, शब-ए-मेराज पुस्तक का सार। 

जय श्री हरि।।

रात्रि में चितवन से परब्रह्म परमेश्वर का दीदार।

मुहम्मद साहब की उस समय आयु ५० वर्ष तथा ३ माह थी। मक्का शहर में उनका घर था।रात के समय आराम करने के बाद वह प्रार्थना करने विस्तर से उठे तथा हाथेली पर लोटा से पानी डाल ही रहे थे कि इतने में शक्ति स्वरुप ने उनके प्राण को अलौकिक आभा से भरकर पवित्र कर दिया।

मुहम्मद साहब का अंत:करण पवित्र हो गया ,अब उन्हें बुर्राक नामक घोड़े पर बैठाया गया तथा जब वह चलने लगे तब आवाज आई - हे मुहम्मद! मुझे आपसे कुछ प्रश्न करने है , कुछ देर रुकिए।तब मुहम्मद ने देखा कि एक बूढ़ी औरत खड़ी है तब वह आगे बढ़ गये। शक्ति देव ने मुहम्मद साहब को बताया कि तुमने उसकी बातों को न सुनकर बहुत अच्छा किया कारण कि यह माया है।यह परब्रह्म से मिलने में बाधा उत्पन्न करती है तथा इसके कारण ही आपका समुदाय माया में फंसा हुआ है।

अब उन्हें तीन प्याले दिए गए जिसमें एक में दुग्ध, दूसरे में शहद तथा तीसरे में पानी था।तब मुहम्मद साहब ने दुग्ध का प्याला ले लिया और दुग्ध को पी गये।

अब शक्ति देव ने बताया कि आपने बहुत अच्छा किया कारण कि दुग्ध रुप में यह आनंद ही था।

यहां से अब वह गोवर्धन पर्वत पहुंचे। तब शक्ति देव के कहने से वहां उन्होंने प्रार्थना की कारण कि वहां पर मूसा पैगंबर को ब्रह्म वाणी सुनाई दी थी। इसके बाद थोड़े आगे जाने पर फिर से प्रार्थना की कारण कि वहां शक्ति देव का अवतरण हुआ था।

अब उन्हें अरब के फलस्तीन में ले जाया गया जहां सभी अवतार एकत्रित थे।सबने मुहम्मद साहब के नेतृत्व में परब्रह्म परमेश्वर की प्रार्थना की। 

वहां से आगे वैतुल मुकद्दस स्थल के पत्थर ने मुहम्मद से कहा कि आप अपने चरणों को मुझ पर रखकर मुझे पवित्र करें।(सत्तर हजार वर्षों से कोई पैर नहीं पड़ा था )तब उन्होंने उसकी इच्छा पूरी की।

अब आकाश में मुहम्मद साहब को श्री नारायण मिलें ,उनसे मिलकर आगे जाने पर उन्हें बहुत विस्तृत पक्षी दिखाई दिया जिसके पंख पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण तक फैले हुए थे।

अब इंद्र को देखा -यह वर्षा का देवता था और सभी देवों का राजा 

उनका आदर सत्कार पाकर वह आगे बढ़ गये

और देखा कि देवगण कुछ व्यक्तियों को दण्डित कर रहे थे शक्ति देव ने बताया कि इन लोगों ने परब्रह्म परमेश्वर को छोड़कर मायावी कामों को प्राथमिकता दी तथा नृत्य आदि में मन लगाने वाले थे अतः उनके सिर कूटे जा रहे हैं।

कुछ ऐसे थे जिनकी जीविका चोरी, हेराफेरी और धोखाधड़ी से प्राप्त धन से चलती थी अतः उन्हें जलती आग में फेंक दिया जाता था। इस प्रकार से बहुत कुछ देखा।

अब आगे जाने पर शीतल एवं सुगंधित ध्वनि सुनाई दी यह वैकुंठ धाम से आ रही थी। वैकुंठ धाम का वैभव बड़ा ही दिव्य था।

अब मृत्यु देव लिखाई दिये उनके चार मुख थे परन्तु मुहम्मद के प्रणाम करने पर भी मृत्यु देव ने कोई उत्तर न दिया

तब मृत्यु देव को परब्रह्म का आदेश मिला जिससे उन्होंने मुहम्मद साहब का आदर -सत्कार किया।

पुनः आगे जाने पर श्रीविष्णु देव ने मुहम्मद साहब का आदर सत्कार किया। श्री विष्णु देव के हजारों मुख थे , हजारों नेत्र तथा पैर आदि थे सम्पूर्ण प्राणी में इसका ही स्वरूप है। परब्रह्म परमेश्वर इसके द्वारा सम्पूर्ण विश्व का पालन पोषण करते हैं।

अब ब्रह्मा जी ने मुहम्मद का आदर सत्कार किया

इसके बाद अब चार मुख वाले देवता को मुहम्मद ने देखा

सारी धरती , आकाश उसके घुटनों पर थे ,वह वहुत विशाल था।

मुहम्मद साहब ने प्रणाम किया तब उसने कुछ नहीं कहा।

परब्रह्म ने उस विशाल देव से कहा-हे ब्रह्म देव!

यह हमारा प्रियतम है आप इनका आदर सत्कार करें तथा सभी प्रश्नों का उत्तर दें।

तब उसने मुहम्मद से कहा - जबसे मुझे परब्रह्म ने बनाया तब से सृष्टि कर्तव्य के कारण मुझे समय नहीं मिलता

अतः मैं आपके प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सका।

अब आगे जाने पर यमराज दिखाई दिए।

यमराज से मुहम्मद साहब ने नर्कों का वर्णन सुना ,उसे सुनकर वह बड़े दुखी हो गये। इसके बाद सातवें आसमान पर पहुंचे तो देखा कि देवगण परब्रह्म परमेश्वर की आराधना कर रहे हैं।

आगे जाने पर चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश दिखाई।यह प्रकाश महाविष्णु का ज्योति-स्वरूप था जो दिव्य वैकुंठ धाम के मालिक हैं। परब्रह्म ने उनसे कहा - हे प्रभु! हमारे प्रियतम मुहम्मद यमराज के मुख से नर्कों का वर्णन सुनकर बहुत दुखी हो गये हैं अतः आप

वैकुंठ धाम में कुछ क्षण उन्हें आनंद प्रदान करें। 

इसके बाद मुहम्मद साहब ने बेहद मण्डल में प्रवेश किया।बेहद मण्डल में हजारों परकोटे, विमान स्थित हैं तथा रत्नमय भूमि थी

यहां की सब दृष्टि दिव्य थी । यहां परब्रह्म परमेश्वर की बाल एवं किशोर स्वरुप की लीलाएं अखण्ड हैं। परमेश्वर की प्रार्थना कर आगे बढ़ गये।


अब मुहम्मद साहब अक्षर धाम में एक बेर के नीचे पहुंच गए तब फरिश्ते ने आगे जाने से मना कर दिया। कारण पूछने पर उसने कहा - परब्रह्म की आज्ञा से मैं आगे नहीं जा सकता।

तब मुहम्मद ने कहा - हे प्रभु!

मेरे कहने से आप परमेश्वर के पास चलें

तब फरिश्ते ने कहा कि यदि मैं आगे चलूं तो मेरे पैर जलने लगेंगे।

अब बुद्धि के देवता मुहम्मद को यमुना नदी के पुल के निकट तक ले गये जहां परब्रह्म परमेश्वर ने दिव्य आनंद तथा प्रेम और ज्योति मय सुखपाल भेजा जिसमें बैठकर वह मूल मिलावे में पहुंच गए।

वहां से वह परमेश्वर को देखने लगे 

निगाह हटती न थी नेत्रों से अश्रु बह रहे था उनका ह्रदय बड़ा भावुक था ,सारा शरीर कम्पायमान हो रहा था तब प्रभु ने मुहम्मद को अपने निकट बुलाया।

मुहम्मद साहब श्री चरणों में गिर पड़े। सच्चिदानन्दघन परमेश्वर ने उठाकर गले से लगा लिया और अपने निकट बैठाकर पूछा- 

हे मेरे प्रिय! आप मेरे लिए क्या भेंट लेकर आए हो

तब मुहम्मद ने कहा- हे परमेश्वर!हम संयम और अद्वैत का अलौकिक एवं अनन्य प्रेम लेकर आए हैं।

अब ईश्वर ने


 उन्हें परमधाम का दिव्य ज्ञान दिया।( कुल ९०००० शब्दों में ज्ञान)

आप ३०हजार शब्दों को कुरान में प्रकट करना,और ३०हजार शब्दों को हदीस के माध्यम से तथा शेष जो ३०हजार शब्द हैं वह किसी से प्रकट नहीं करना कारण कि उनमें यहां के भेद रहस्य है। परम धाम के गूढ़ रहस्य हमारे आवेश स्वरुप बुद्ध निष्कलंक प्रकट करेंगें। 

हे परमेश्वर ! संसार के लोग मुझसे पूछेंगे तब मैं उन्हें क्या उत्तर दूंगा।तब मुस्कुरा कर उस ईश्वर ने कहा कि संसार के प्राणी सन्मार्ग प्राप्ति हेतु १ वर्ष में ६मास उपवास तथा २५ घण्टे में प्रार्थना करें।

तब मुहम्मद ने बड़ी करुण प्रार्थना की और कहा - परमेश्वर यह सब बड़ा कठिन है। हे ईश्वर! मेरा समुदाय यह करने में समर्थ नहीं है। यदि १वर्ष में ३०दिन उपवास तथा एक दिन में ५समय की प्रार्थना करना उचित लगे तो कहिए 

तब अल्लाह ने कहा-हे मुहम्मद !जो आपने विचार किया है,वह बहुत उत्तम है , तथास्तु।

इस प्रकार से मुहम्मद और परबरदिगार प्रभु के मध्य बहुत सी बातें हुई जिन्हें हमें शब-ए-मेराज पुस्तक में विस्तार से अध्ययन करना चाहिए।


 प्रभु से आज्ञा पाकर परमधाम में ऐश्वर्य देखने लगे। वहां यमुना नदी के रत्नों से निर्मित अद्भुत तट देखे तथा भांति -२ के दिव्य वृक्ष देखे इसके बाद होज:कौसर तालाब को देखा उसका भी तट जवाहरातों से जड़ा था।इस प्रकार परमेश्वर की आज्ञा से वहां बहुत सी अद्भुत बस्तुऐ देखीं।

वहां के सब पदार्थ चिन्मय और दिव्य हैं।

वापस अक्षर धाम में आए तो शक्ति देव से मिले और फिर पृथ्वी पर प्रकट हो गए,देखा तो खुद आश्चर्य में पड़ गये

हाथ में पानी से भरा लोटा था।

उन्होंने यह सम्पूर्ण रहस्य वर्णन विश्वास पात्र सज्जनों से कहा।

यहां पर यह लेख समाप्त किया जाता है।

यह सम्पूर्ण अद्भुत रहस्य 

शब-ए-मेराज पुस्तक में वर्णित है।

कबीर साहब ने भी इसी प्रकार से मुहम्मद साहब का गोलोक से होते हुए सतलोक तक जाना और वहां तारक ब्रह्म आदि राम के दर्शन करना -आदि बताया है।

निजानंद सम्प्रदाय।

मैंने इस लेख को जहां तक सम्भव हो सकता था ,छोटा करने का प्रयास किया है।

धन्यवाद।।

रात्रि में परमेश्वर का दीदार, मोहम्मद बोध, शब-ए-मेराज पुस्तक का सार।











टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
Iska matlab allah krishna bhagwan hai